लॉकडाउन शुरू होने के साथ ही यू पी और विशेषकर बिहार के प्रवासी कामकारों ने अपने  गांव जाने के लिए पैदल ,साईकल ,ऑटो से जाना शुरू किया तो सरकार ने विशेष श्रमिक ट्रैन चलाने की घोषणा कर दी | 

लॉकडाउन खुलते  ही प्रवासी कामगार अब वापस आने को बेचैन दिल्ली ,हरियाणा ,पंजाब मे वापस बसों या निजी वाहनों से आ रहे है |  पंजाब मे धान की खेती का समय है |फैक्ट्रिया चालू हो रही है  फैक्ट्रियो के मालिक प्रवासी कामकारो को बुला रहेहै एक प्रवासी ने बताया गांव मे काम नही है| जब उससे पूछा- फिर गाँव मे क्यों गए उसने कहा सब साथी जा रहे थे |सरकार ने लॉकडाउन के कारण धर्मिक स्थलों या किसी कारण रुके हुए लोगो को अपने घरों तक पहुंचना था | 

 देश के अन्य प्रदेशो मे रह रहे लोगों ने अपने गाँव मे जाने की मांग उठानी शुरू कर दी | प्रवासी कामकारो की सबसे बड़ी चिंता इस बात की भी है जिन व्यवसाओं पर उनका एकाधिकार है  कहीं वहां के स्थनीय लोग वह व्यवसाय करना शुरू कर न दे  | स्थनीय युवा ने बताया पहले मै वेटर का काम करता था अब सब्जी की रेहड़ी लगाकर अच्छा पैसा कमा लेता हूँ | एक पंजाबी जो एक मजदूर का काम करता था आज वह राजमिस्त्री का काम कर रहा है जब गाँव गए प्रवासी को  उस के साथी फोन करके  बताते  है तो उसकी बेचैनी जहां से गए वहा आने की है | समय की मांग क़ो देखते हुए फैक्ट्री  मालिक स्थनीय युवाओ  को रोजगार प्रदान करे |