भारत में कोविड-19 महामारी सामुदायिक फैलाव के दौर में नहीं पहुंची है लेकिन देश को निगरानी और रोकथाम प्रणाली पर कारगर अमल जारी रखना होगा।

 

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद-आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ बलराम भार्गव ने नई दिल्ली में भारत की रक्तसीरम से संबंधित सेरो सर्वेक्षण रिपोर्ट जारी करते हुए इस बात की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भारत जितना बड़ा देश है, उसे देखते हुए महामारी का फैलाव काफी कम रहा है। डॉ. भार्गव ने बताया कि भारत में प्रति लाख जनसंख्या के पीछे कोविड-19 रोगियों की संख्या दुनिया में सबसे कम है। इसी तरह प्रति लाख मृत्यु दर की दृष्टि से भी भारत दुनिया के सबसे कम मृत्यु वाले देशों में है।

सेरो सर्वे के परिणाम में बताया गया है कि लॉकडाउन और कंटेनमेंट की नीति सफल रही है और इससे संक्रमण की दर कम करने और तेजी से इसका फैलाव रोकने में मदद मिली है। लेकिन सर्वेक्षण के अनुसार देश की काफी बड़़ी आबादी महामारी के प्रति अब भी संवेदनशील बनी हुई है। सर्वे में यह भी बताया गया है कि लॉकडाउन और कंटेनमेंट की नीति सफल रही है और इससे संक्रमण की दर कम करने और तेजी से इसका फैलाव रोकने में मदद मिली है। लेकिन सर्वेक्षण के अनुसार देश की काफी बड़़ी आबादी महामारी के प्रति अब भी संवेदनशील बनी हुई है।

रक्त सीरम से संबंधित सर्वेक्षण के परिणामों के अनुसार देश के 83 चुने हुए जिलों में शून्य दशमलव सात तीन प्रतिशत आबादी में कोरोना वायरस संक्रमण का कारण किसी संक्रमित व्यक्ति के सम्पर्क में आना रहा है।

कोविड-19 महामारी के बारे में यह सर्वेक्षण देश के चुने हुए 83 जिलों में इस साल मई में कराया गया। इस सर्वेक्षण का पहला चरण पूरा हो गया है और दूसरा चरण जारी है।

सर्वेक्षण के नतीजों का जिक्र करते हुए नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) और अधिकार सम्पन्न समिति के सदस्य डॉ. विनोद पॉल ने कहा कि रिपोर्ट के अनुसार शहरी झुग्गी बस्तियों में कोविड महामारी का प्रकोप अधिक देखा गया है। उन्होंने कहा कि महामारी की वजह से मृत्यु दर शून्य दशमलव शून्य आठ प्रतिशत है, जो बहुत कम है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी स्थिति में राज्यों को अपनी चौकसी में जरा भी ढील नहीं देनी चाहिए और निगरानी तथा रोकथाम की रणनीतियों पर अमल जारी रखना चाहिए।

स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रतिनिधि ने बताया कि कोरोना महामारी से स्वस्थ होने वाले रोगियों की दर बढ़ कर 49 दशमलव दो एक प्रतिशत हो गई है। स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि इस समय ठीक हुए रोगियों की संख्या इलाज करा रहे मरीजों की तुलना में अधिक है।