प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने प्रवासी मजदूरों और ग्रामीण लोगों को आजीविका के अवसर उपलब्‍ध कराने के लिए आज एक साथ छह राज्‍यों में गरीब कल्‍याण रोजगार अभियान की शुरूआत की।

 

इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने कहा कि यह अभियान स्‍थानीय स्‍तर पर अवसंरचना निर्माण के साथ ग्रामीण क्षेत्रों के विकास में मददगार होगा।

प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर लद्दाख में देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए बलिदान देने वाले शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि वे चाहते है कि इस घड़ी में पूरा देश इन जवानों और इनके परिवारों के साथ खड़ा हो।

कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में ग्रामीण भारत के योगदान की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि गांवों  जिस तरह से इस संकट की सामना किया है वह शहरों के लिए एक बड़ी सीख है। 

पीएम मोदी ने कहा कि सरकार कोरोना महामारी के मौजूदा समय में इस बात का पूरा ध्‍यान रख रही है कि गांवों में रहने वाले लोगों को किसी तरह का कर्ज न लेना पड़े। उन्‍होंने कहा कि प्रधानमंत्री गरीब कल्‍याण योजना से पहले आत्‍मनिर्भर भारत अभियान की शुरूआत की गई है और इस अभियान के शुरू होने के कुछ सप्‍ताह के भीतर ही इस पर 1.75 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। तीन महीने में 80 करोड़ गरीब परिवारों को राशन उपलब्‍ध कराने का काम किया गया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि दस हजार करोड़ रूपये से ज्‍यादा की राशि बीस करोड़ महिलाओं के जन-धन खाते में सीधे डाली गई। उन्‍होंने कहा कि ऐसा इसलिए संभव हो पाया क्‍योंकि पिछले कुछ वर्षों में गरीब लोगों के खाते में सीधे पैसा हस्‍तांतरित करने के लिए जरूरी अवसंरचना विकसित की जा चुकी थी। उन्‍होंने कहा कि एक आत्‍मनिर्भर भारत के लिए किसानों का आत्‍मनिर्भर होना भी जरूरी है। इस बात को ध्‍यान में रखते हुए सरकार ने पिछले कुछ दिनों में कई अनावश्‍यक कानूनों को खत्‍म किया है। उन्‍होंने कहा कि अब किसान बिना किसी बाधा के कहीं भी और किसी को भी अपने उत्‍पाद बेच सकते हैं। 

प्रधानमंत्री ने बिहार के खगडि़या जिले में तेलिहार गांव से वीडियो कॉंफ्रेंस के माध्‍यम से गरीब कल्‍याण योजना का शुभांरभ किया। इस अवसर पर बिहार के मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार तथा कुछ और राज्‍यों के मुख्‍यमंत्री तथा केंद्रीय मंत्री भी उपस्थित थे।

यह अभियान 12 विभिन्‍न मंत्रालयों और विभागों के समन्वित प्रयासों से शुरू किया गया है जिसमें ग्रामीण‍ विकास, पंचायती राज, सड़कर परिवहन और राजमार्ग, खान, पेयजल और स्‍वच्‍छता, पर्यावरण, रेलवे, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा, सीमा सड़क, दूरसंचार और कृषि मंत्रालय शामिल है।  

यह अभियान बिहार, झारखंड, उत्‍तर प्रदेश, मध्‍य प्रदेश, ओडिशा और राजस्‍थान के एक सौ 16 ऐसे जिलों में चलाया जाएगा जहां लौटने प्रवासी मजदूरों की संख्‍या 25 हजार से ज्‍यादा है। इनमें 27 आकांक्षी जिले भी शामिल हैं। इन जिलों में यह अभियान सामान्‍य सेवा केंद्रों और कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्‍यम से चलाया जाएगा।

योजना को मिशन मोड में 125 दिनों में पूरा करने का लक्ष्‍य रखा गया है। इसके तहत प्रवासी मजदूरों को 25 विभिन्‍न प्रकार के रोजगार उपलब्‍ध कराने और ग्रामीण क्षेत्रों में जरूरी ढांचागत विकास पर ध्‍यान केंद्रित किया जाएगा।