वैसे तो कोरोना कॉल में समाज जीवन का कोई भी क्षेत्र अछूता नहीं रहा है लेकिन शिक्षा समाज का वर्तमान ही नहीं अपितु भविष्य निर्धारण करने वाला क्षेत्र है इस लिए यह एक महत्वपूर्ण क्षेत्र बन जाता है वैसे तो हमारा स्पष्ट मानना है कि शिक्षा परिवार शिक्षक ,शिक्षार्थी और शिक्षाविद  से मिलकर बनता है लेकिन हाल ही के वर्षों में जिस प्रकार शिक्षा क्षेत्र में निजी संस्थान, व्यक्ति व्यापारी मानसिकता से आया है तब से यह एक चौथा अंग प्रशासक या मालिक भी महत्वपूर्ण हुआ है 

इन सब विषयों के बीच हम आज के विद्यार्थी की बात करेंगे ! आजकल विद्यार्थी परीक्षाओं को लेकर बड़े परेशान हैं एक और जहां देश की परिस्थितियां ही अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है उसे दूसरी ओर विभिन्न माध्यमों से आने वाली है अस्पष्ट सूचनाएं ,आधी अधूरी जानकारी, और अफवाहऐं उसको ज्यादा परेशान कर रही है 

मित्रों ! हम सभी जानते हैं कि ऐतिहासिक रूप से विश्वभर में फैली इस महामारी के समय में हर किसी ने परिस्थितियों से समझौता किया है उसके अनुरूप ही स्वयं को डाला है समाज जीवन के हर क्षेत्र में आपातकाल सा लगा है इस हेल्थ एमरजैंसी के समय में सर्वोपरि हमारी सुरक्षा ही है 

यह बात देश की सरकार ,विश्वविद्यालय प्रशासन सहित हर कोई समझदार व्यक्ति, संस्थाएं जानती है इसलिए शायद अमेरिका सहित कुछ देशों ने तो अपने विद्यार्थियों के एक शिक्षा सत्र को पूरा ही सस्पेंड कर दिया है ! 

लेकिन हमारे देश की सरकार ने छात्रों को भविष्य में समय का नुकसान न हो इस लिए बहुत से विकल्प पर भी विचार किया है  और समय समय प्रदेश के  उच्च शिक्षा संस्थानों और विश्वविद्यालयों , विद्यालय संस्थानों को निर्देश भी दिए जा रहे हैं !  उपरोक्त परिस्थितियों में भी यह सभी उच्च  शिक्षा संस्थान, विश्वविद्यालय आदि  गतिशील भी है लेकिन चिंता भी लगी हुई है प्रशासक ,वाइस चांसलर ,डायरेक्टर, प्राध्यापक आदि मिलकर बहुत से विकल्पों पर विचार कर रहे , योजनाएं बना रहे लेकिन कोविड-19 के कारण बार-बार बदलती परिस्थितियों और आने वाली नई नई समस्याएं इन योजनाओं को पूरा नहीं होने दे रही है इसलिए बार-बार बदलने के लिए मजबूर हो रहे हैं ! 

अब इस भूमिका के बाद मुख्य मुद्दे पर आते हैं कि इन सब परिस्थितियों के बीच में विद्यार्थी समुदाय बहुत परेशान ,बेहाल दिखाई दे रहा है जिस शिक्षा की पूर्णता को वह भली-भांति समझता है कि शिक्षा संस्थान में  प्रवेश लेना ,पढ़ना,  मूल्यांकन कराना ,परिणाम लेना इन चार चरणों में पूर्ण होती है अब वो परिस्थितियों का रोना रोकर के केवल शिक्षा का एक चरण प्रवेश और थोड़ा बहुत दूसरा चरण पढ़ाई को ही  पूरा मान कर अपना बेड़ा पार करने की सोच रहा है ! हो सकता है कि आज उसे जैसे तैसे अपनी मंजिल पार करने के लिए राजनीति के लोकप्रिय सिद्धान्त लोकलुभावनवाद के आधार पर "मास प्रमोशन " वाली मांग सही लग रही है और सही भी है !  किस को अच्छा नही लगता कि बिना कुछ किये  मंजिल पर पहुंच जाना , जीवन में शॉर्टकट अपनाना !

 जो छात्र युवा होने का दावा करता है ,देशभक्त होने का दावा करता है, थोड़ी सी विपरीत परिस्थितियां आई और पलायन का सोचने लग गया ? 

 शिक्षा के मापदंडों को बाईपास करके आगे बढ़ने की सोचने लग गया ?  

मित्रों !विद्यार्थियों की सोच स्वयं नहीं बनी है बल्कि बनाई गई है उसे बहकाया गया है उसे केवल परिस्थितियों का रोना ही सीखाया गया है नकारात्मक राजनीति कर छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करना, हर किसी को क्रांतिकारी बनने का सपना दिखाना ,अपने राजनीतिक आकाओं की इच्छा और नक्शे कदम पर चलने वाली पार्टियां और कर भी क्या सकती है ! आज बहुत कुछ हद तक अपनी स्वयं की कमजोरियों की आड़ में इन राजनीतिक छात्र पार्टियों के भ्रम जाल के शिकार इन विद्यार्थियों को सही सकारात्मक नेतृत्व देने  और चुनौतियों का सामना करते हुए अपने पुरुषार्थ से शिक्षा पूर्ण करने का संकल्प याद दिलाने का समय है आज उन्हें समझाना होगा कि" मास प्रमोशन" का यह शब्द जाल, मायाजाल किस प्रकार से उनके भविष्य में उनके लिए मुश्किलें और  चुनौतियां पैदा करने वाला है !

हम जानते हैं कि जिस प्रकार  परीक्षाएं देना और परिणाम लेना हमारी जिम्मेदारी और अधिकार हैं उसी प्रकार पूर्ण जवाबदेही के साथ ,इन परिस्थितियों में आवश्यक सुरक्षा मापदंडों को पूर्ण करते हुए ,स्वस्थ वातावरण में परीक्षा लेना और परिणाम निकालना संस्थानों के लिए इससे भी  ज्यादा बड़ी चुनौती है ! यह देख सुन कर के बड़ी हैरानी होती है कि एक और इन परिस्थितियों में परीक्षा लेना और समय पर परिणाम निकालना सरकार ,प्रशासन और विश्वविद्यालयों के लिए इतना मुश्किल है फिर भी वह छात्रों के भविष्य के लिए विभिन्न विकल्पों और समुचित उपायो के साथ परीक्षा लेने को तैयार हैं वहीं दूसरी ओर जिस छात्र को केवल परीक्षा देनी है वह परीक्षा से इनकार कर रहा है जो उसकी न केवल जिम्मेदारी है बल्कि उसके भविष्य के लिए आवश्यक भी है  हा , यह बात अलग है कि आज उनसे बात समझ में नहीं आ रही है !

मित्रों ! हम जानते हैं कि इन परीक्षाओं के लिए हमने मोटी फीस चुकाई है स्वस्थ एवं सुविधाजनक वातावरण , माहौल में परीक्षा आयोजित कर , समय पर परिणाम निकालना विश्वविद्यालय और सरकार की जिम्मेदारी है आज आवश्यकता इस बात की है कि सारा छात्रसमुदाय इकट्ठा होकर सरकार या प्रशासन को अपनी  जिम्मेदारियों का अहसास कराए तथा उनकी ये जिम्मेदारियां कैसे पूर्ण होगी, इस हेतु संवाद करें और समाधान प्रस्तुत करें  और इसके बाद भी यदि प्रशासन परीक्षा करवाने में असमर्थ होता है परिस्थितियों की दुहाई देता है तो वह विकल्प निकाले समाधान सुझाये और और कुछ भी संभव न हो तो बिना परीक्षा पास करने का निर्णय करें ताकि हम उनसे अपनी फीस वापस मांगने का अधिकार रखे लेकिन  यहां पर उल्टा हो रहा है सरकार विद्यार्थियों  की समस्त जिम्मेदारी लेते हुए परीक्षा लेने को तैयार है विद्यार्थी पलायन करता नजर आ रहा है जबकि बहुत से संस्थान अपने अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों को छोड़कर के बाकी विद्यार्थियों को प्रमोट करने का निर्णय भी कर रहे है ! हो सकता है उनकी कोई मजबूरी हो हम उनका भी स्वागत करते है 

हे पार्थ ! पलायन नहीं चुनौती स्वीकार करो ! श्रीमदभगवत गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन से यही कहा था कि पलायन समाधान नहीं है युद्ध रूपी चुनौती स्वीकार कर ,  इसी में सबका भला है यही धर्म है आज देश और दुनियां का सबसे बड़ा जिम्मेदार विद्यार्थी संगठन ABVP विद्यार्थियों से यही आव्हान कर रही है हे विद्यार्थी साथियों ! परीक्षा रूपी चुनौती से पलायन नही , सामना कर विजयी बनों ! 

हालांकि आज विद्यार्थी इसका महत्व समझ नहीं पा रहा है कि यह पलायन का विचार उसके भविष्य के लिए कितना खतरनाक होगा , इसके दुष्परिणाम क्या-क्या होंगे जैसे :- 

1.परीक्षा और परिणाम शिक्षा को पूर्ण करते हैं इसके अभाव में विद्यार्थी सुविधाजनक स्थिति में आ जाएगा ! उसमें प्रतियोगिता की भावना कम हो जाएगी !

2.वह  "मैं बिना परीक्षा पास हुआ हूं " इस हिनता का शिकार होगा ! भविष्य में परीक्षा पास करके आने वालों के साथ प्रतियोगिता में पिछड़ जाएगा ! 

3.भविष्य में जहां कहीं भी उसे अपनी मार्कसीट अथवा डिग्री दिखानी होगी उसके मूल्यांकन का आधार अलग होगा, उसका स्वयं का आत्मविश्वास कमजोर होगा ! 

4. मित्रों ! हर प्रकार की प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाला या दौड़ने वाला धावक शुरुआत में अपनी उर्जा बचाकर अंतिम समय में पूरी ताकत के साथ सबसे आगे आने के लिए तेज दौड़ता है जिन विद्यार्थियों को प्रथम वर्ष ,द्वितीय वर्ष में अच्छे मार्क्स नहीं मिल पाए ,वह उसी प्रकार की तैयारी कर रहा है कि मैं अंतिम वर्ष में  अपने मार्क्स ठीक कर लूं , सुधार  कर लूँ ! ताकि भविष्य में कहीं एडमिशन लेने के लिए स्थान सुरक्षित जाएगा ! वो  सभी छात्र इस प्रमोसन  के चक्कर में कुछ नहीं कर पाएंगे ,उनका परिणाम है पिछले वर्षों के  अनुसार जारी किया जाएगा ! और उसका नुकसान होगा ! 

अब प्रश्न यह है कि विद्यार्थी क्या करें ? क्या नहीं कर सकते वो ? 

कहने को तो हम दुनिया को मुट्ठी में लेकर घूमते हैं 

अभी भी करने को बहुत कुछ है हमारे पास , सुना है न " जहाँ चाह वहाँ राह"

1.पढ़ाई करना चाहते हो ?

खूब पढ़ाई करो ! खूब समय मिला है आज ऑनलाइन पढ़ाई के माध्यम उपलब्ध  है , शिक्षक उपलब्ध है ,पुस्तके उपलब्ध है ,नोट्स उपलब्ध है ! बस आपको अपनी मुट्ठी खोलनी है कुछ बटन दबाने है जिससे चाहे जुड़ सकते हो , जिसे चाहे ढूंढ सकते हो ,जो चाहे पा सकते हो ! अब यह मत कहना कि इंटरनेट उपलब्ध नहीं है आज भारत में कुछ अपवादों को।छोड़ कर लगभग सभी जगह हाई स्पीड इंटरनेट उपलब्ध है 

इस आपातकाल में रास्ता निकालना है तो निकल जाएगा , समाधान बनना है तो बन जाओगे और समस्याओं का रोना रोने वाली भीड़ में खड़ा होना है तो हो जाओगे !  तुम्हारी मर्जी ! 

नहीं तो ,आज समाज विज्ञान के नए नए अनुभव लेने का भी सर्वोत्तम समय है यह क्यों नहीं सोचते चलो कुछ नया सीखते हैं कुछ नया करते हैं जो क्लास में  नही सीख पाते और ना कोई सिखा सकते है ! 

दूसरा यदि छात्र नेता हो या  छात्र पार्टी में काम करते हो तो आंदोलन करना होगा ! खूब आंदोलन करो ,बहुत से मुद्दे हैं, छात्रों की आवाज बनो ! 

अभी परीक्षा नहीं देनी है , मत दो ! विश्वविद्यालय और सरकार के खिलाफ चलना है खूब खिलाफ चलो !

बस प्रार्थना यह है कि स्वयं के खिलाफ मत चलो 

शिक्षा के खिलाफ ,मत चलो 

देश के खिलाफ, मत चलो 

आज भी हमारे पास आंदोलन के बहुत से मुद्दे हैं 

1.जब तक आवागमन के साधन सुचारू रूप से नहीं चले परीक्षा नहीं होनी चाहिए !

2. जब तक विद्यार्थियों की आवास की व्यवस्था नहीं है परीक्षा नहीं होनी चाहिए ! 

3. जब तक केंद्र और राज्य सरकार स्वास्थ्य संबंधी परिस्थितिया सही नहीं बता दे परीक्षा नहीं होनी चाहिए !

4.परीक्षा लेने के लिए विभिन्न विकल्पों पर  विश्विद्यालय प्रशासन और छात्रों का संवाद हो , 

5 परीक्षा के लिए आने वाले विद्यार्थियों को  स्वास्थ्य विभाग की गाइड लाइन के अनुसार सोशियल डिस्टेसिंग नियमों का पालन करवाया जाए ! 

 ऐसे बहुत से मुद्दे है जिन पर हम प्रशासन से सकारात्मक समाधान हेतु चर्चा कर सकते है ! 

!!इति!! 

(लेखक विद्यार्थी परिषद के उत्तर क्षेत्र संगठन मंत्री है )