'वो अक्सर घर को सम्भालती, संवारती रहती है

 

मेरी मां मेरे घर आने की राह निहारती रहती है

 

लौट कर आऊंगा मैं भी पंछी की तरह मैं भी एक दिन

 

वो बस इसी उम्मीद में दिन गुजारती रहती है

 

उससे मिले हुए हो गया पूरा एक साल लेकिन

 

उसकी बातों में मेरे सरहद पर होने का गुरूर दिखता है।'

 

यह सिर्फ एक कविता नहीं है। सरहद पर तैनात एक भारतीय योद्धा की मां के मन में करवटें लेतीं भावनाएं हैं। मां की इन्हीं भावनाओं को उसके बेटे ने शब्द देकर मां को समर्पित किया और शहीद हो गया। जम्मू-कश्मीर के हंदवाड़ा में रविवार को शहीद हुए कर्नल आशुतोष शर्मा की लिखी ये चंद पंक्तियां दर्शाती हैं कि मातृभूमि के प्रति अपना कर्तव्य निर्वाह करते हुए भी वह अपनी जन्म देने वाली मां को कभी विस्मृत नहीं कर पाते थे। शहीद कर्नल आशुतोष शर्मा की पत्नी पल्लवी ने मीडिया को बताया कि इसी 28 अप्रैल को उन्होंने मां के लिए यह कविता लिखी थी।