चीन को आर्थिक मोर्चे पर चोट पहुंचाने के लिए सरकार के अंदर चीनी सामान के आयात पर प्रतिबंध के लिए मंथन शुरू हो गया है। फैसला लेने से पहले औद्योगिक संगठनों एवं अन्य मैन्यूफैक्चरिंग एसोसिएशन व निर्यातकों की राय मांगी गई है। उनसे यह पूछा जा रहा है कि चीन से होने वाले आयात पर प्रतिबंध लगाने की स्थिति में वह कितने सहज होंगे। खासतौर से विकल्प की तैयारी पूछी जा रही है। जाहिर है कि टेलीकॉम और चीनी एप पर कुछ प्रतिबंध के बाद अब आयात पर सख्त लगाम लगाने की तैयारी हो रही है।

 

सरकार औद्योगिक संगठनों एवं एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल से चीन से आयात होने वाले सामान की सूची की मांग पहले ही कर चुकी है। ताकि यह निश्चित किया जा सके कि किन-किन आइटम का निर्माण हम आसानी से तत्काल रूप से भारत में कर सकते हैं और उन आइटम पर प्रतिबंध लगाने पर भारतीय मैन्यूफैक्चरर्स का कोई नुकसान नहीं हो। विकल्प के रूप में यह भी देखा जा सकता है कि चीन की बजाय और कहां से जरूरी सामान और खासतौर से कच्चा माल मंगाया जा सकता है।

पीएचडी चैंबर के टेलीकॉम कमेटी के चेयरमैन संदीप अग्रवाल के मुताबिक सरकार को साहसिक फैसला करना होगा भले ही कुछ दिनों के लिए हमें महंगे सामान खरीदना पड़े। सभी क्षेत्रों में भारतीय कंपनियों को ट्रायल ऑर्डर देने की शुरुआत होनी चाहिए और उसमें कमी या देरी पर भारतीय कंपनियों पर जुर्माने की शर्त नहीं होनी चाहिए। इस प्रकार के फैसले से भारतीय कंपनियों को टेलीकॉम क्षेत्र में चीन का मुकाबला करने में मदद मिलेगी।