देश भर में फैला कोरोना वायरस खतरनाक होता जा रहा है और लोग इससे बचने के लिए घरों में बंद हैं। शहर में हजारों युवा ऐसे हैं जो मजबूरी में 'कोरोना की जेल' में बंधक बन कर रह रहे हैं। हम बात कर रहे हैं उन विद्यार्थियों की, जो पेइंग गेस्ट बन कर जालंधर में रह रहे हैं।जालंधर के नजदीक 6 बड़ी  यूनिवर्सिटीज है जिस कारन जालंधर स्टडी हब भी है | 

देश के विभिन्न राज्यों से आए विद्यार्थी करीब एक महीने से यहां कमरों में बंद हैं, क्योंकि न तो पढ़ाई चल रही है और न ही वे अपने घर जा पा रहे हैं। शहर में राशन-लंगर इत्यादि बांटने वालों की नजर जरूरतमंदों व गरीबों पर तो पड़ रही है, लेकिन अपने घरों से हजारों मील दूर रह रहे इन विद्यार्थियों की ओर किसी का ध्यान नहीं है। साथ ही संपन्न घरों के होने के चलते ये विद्यार्थी लंगर लेने वालों के बीच खड़े भी नहीं होना चाहते। इनके पास पैसे खत्म होने से राशन इत्यादि खरीदने की समस्या भी खड़ी होने लग गई है। बड़ी दिक्कत यह है कि ये लोग अपनी परेशानी भी किसी से नहीं कह पा रहे, क्योंकि उनका परिवार उनकी परेशानी से और परेशान हो सकता है।

ऐसे विद्यार्थियों से बातचीत की तो पाया कि लगभग सभी की परेशानी एक सी ही है। जिला प्रशासन, पुलिस, सामाजिक या राजनीतिक संस्थाएं भी उनकी सुध नहीं ले रहीं। उन्होंने पुलिस व जिला प्रशासन से गुहार लगाई है कि उनके लिए कोई ऐसा रास्ता निकाला जाए, जिससे वो घर जा सकें।

जालंधर में इस समय अलग-अलग कॉलेज-यूनिवर्सिटी के हजारों विद्यार्थी फंसे हैं, जिनमें  भी विदेशी हैं। विदेशियों को तो भाषा को लेकर भी परेशानी झेलनी पड़ रही है। गढ़ा, अर्बन एस्टेट, चौगिट्टी सहित कई इलाकों में रहने वाले विद्यार्थी अधिकतर विदेशी ही हैं। 

मकान मालिकों ने छोड़ा किराया, कर्फ्यू बढ़ने से मुश्किल बढ़ी

शहर के कई मकान-मालिक ऐसे हैं, जिन्होंने महीना बीत जाने के बाद भी विद्यार्थियों से पैसे नहीं लिए। हालांकि अब कर्फ्यू बढने से उनकी भी मुश्किलें बढ़ गई हैं। कारण, कई मकान मालिक ऐसे हैं जिनके घर का खर्च ही ऐसे किराएदारों या पेइंग गेस्ट की वजह से चल रहा है।  पीजी पर रहने वाले छात्र छात्राओं का खाना भी उन्हें ही देना पड़ता है। इस तरफ ध्यान न दिया तो उनको ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ेगी।