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PM केयर्स फंड की जरूरत क्यों पड़ी

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Need of PM Care Fund

PM केयर्स फंड की जरूरत क्यों पड़ी

पीएम मोदी (PM Narendra Modi) ने 28 मार्च को लोगों से कोरोना के खिलाफ चल रही मुहिम में मदद के लिए पीएम केयर्स फंड ( PM-CARES) में दान करने की अपील की थी.

इसी के साथ कुछ सवाल भी खड़े हुए कि आखिर जब प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (पीएमएनआरएफ) पहले से था तो फिर अलग से पीएम केयर्स बनाने की क्यों जरूरत पड़ी?

पूरा विश्व कोरोना वायरस के महामारी से जूझ रहा है। भारत भी इस महामारी से बचने के लिए कई उपाय किए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से PM-CARES में दान देने की भी अपील की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब PM-CARES की बात की है तो अब इसको लेकर चर्चा यह है कि आखिर इस PM-CARES की क्या आवश्यकता है जबकि पहले से ही प्रधानमंत्री राहत कोष है। 

 

  • लोग प्रधानमंत्री राहत कोष में क्यों ना दान करें? 
  • PM-CARES में क्यों दान करें? 

 

आज हम आपको PM-CARES और PMNRF के बारे में बताएंगे और यह भी बताएंगे कि आखिर इन दोनों के बीच क्या अंतर है?

कब बना था प्रधानमंत्री राहत कोष ?

सबसे पहले बात प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) की करते हैं। यह राहत कोष से 1948 में बनाया गया था। इसका उद्देश्य भारत के विभाजन के दौरान और उसके ठीक बाद पाकिस्तान से विस्थापित लोगों को सहायता करना था। प्रधानमंत्री राहत कोष के संसाधनों का इस्तेमाल मुख्य रूप से बाढ़, तूफान या भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं में मारे गए लोगों और उनके परिवार वालों की मदद के लिए किया जाता है। इसके अलावा दुर्घटनाओं और दंगों से भी पीड़ितों को तत्काल मदद के लिए प्रधानमंत्री राहत कोष का इस्तेमाल किया जाता है। प्रधानमंत्री राहत कोष का इस्तेमाल चिकित्सीय उपचार प्रदान करने के लिए भी किया जाता है। फंड में पूरी तरह से सार्वजनिक योगदान होता है और इसे कोई बजटीय समर्थन नहीं मिलता है। 

फंड के कॉर्पस को विभिन्न रूपों में अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों और अन्य एजेंसियों के साथ निवेश किया जाता है। संवितरण प्रधान मंत्री के ही अनुमोदन से किए जाते हैं। 

प्रधानमंत्री राहत कोष के बारे में एक बात गौर करने वाली है कि यह संसद द्वारा गठित नहीं किया गया है। विभाजन के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने कहा था कि विस्थापितों के मदद के लिए सरकार प्रयास कर रही है परंतु यह पर्याप्त नहीं है और इसीलिए इनकी मदद के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी है। इसी के तहत एक राष्ट्रीय कोष की स्थापना की गई। खास बात यह भी है कि प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष का गठन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने किया था हालांकि इसके प्रबंध समिति ने हमेशा कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष को शामिल किया गया है। हम यह बताते हैं कि जब फंड को बनाया गया था तो कौन-कौन से लोग इसके प्रबंध समिति में शामिल थे। 

i) प्रधान मंत्री

ii) भारत की राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष।

iii) उप प्रधान मंत्री।

iv) वित्त मंत्री।

v) टाटा ट्रस्टीज़ का एक प्रतिनिधि।

vi) फिक्की द्वारा चुने जाने वाले उद्योग और वाणिज्य का प्रतिनिधि।

हालांकि बाद में समय-समय पर इसमें नए सदस्यों को जोड़ा गया है।

1985 में एक ऐसा समय आया जब इस फंड प्रबंधन की जिम्मेदारी प्रधानमंत्री को सौंप दिया गया। प्रधानमंत्री को यह भी अधिकार दिया गया कि वह जिसे चाहे उसे फंड का सचिव बना सकते हैं जिस पर फंड के बैंक खातों को संचालित करने का अधिकार होगा। यानि कि यह फंड पूरे तरीके से PMO के द्वारा संचालित किया जाने लगा। ध्यान देने वाली बात यह है कि यह निर्णय तब लिया गया था जब राजीव गांधी प्रधानमंत्री होने के नाते इस फंड के प्रभारी थे।

PM-CARES

अब बात PM-CARES की करते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना महामारी से लड़ने के लिए सार्वजनिक योगदान के लिए PM-CARES फंड का गठन किया है। इसके तहत मिलने वाले दान को कोरोना वायरस से प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। इस फंड के अन्य सदस्यों में रक्षा मंत्री, गृह मंत्री और वित्त मंत्री को शामिल किया गया है। इसके अलावा विज्ञान, स्वास्थ्य, कानून और सार्वजनिक क्षेत्रों में अच्छे काम करने वाले लोगों को भी इसके सदस्य के रूप में नियुक्ति की गई है। इस फंड के गठन के साथ ही प्रसिद्ध हस्तियों के साथ-साथ आम लोगों ने भी लाखों की संख्या में अपने योगदान किए हैं। 

हालांकि एक सवाल बार-बार उठता रहा कि प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष होने के बावजूद भी पीएम के अंत की शुरुआत क्यों की गई? 

अतः यह कहना भी गलत नहीं होगा कि PM-CARES प्रधानमंत्री राहत कोष की तुलना में अधिक पारदर्शी है। PM-CARES में सलाहकार बोर्ड की स्थापना का भी प्रावधान है जिसमें चिकित्सा व्यवसाई और स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों, शिक्षाविदों, अर्थशास्त्रियों और वकीलों को रखा जा सकता है। PM-CARES को लेकर राजनीति भी शुरू हो गई है। 

मसलन, प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष की ऑडिट का अधिकार सीएजी को है तो फिर पीएम केयर्स का ऑडिट कौन करेगा? कुछ चीजें दोनों फंड में कॉमन हैं. पीएमएनआरएफ या फिर पीएम केयर्स दोनों में दान करने पर 80 जी के तहत छूट मिलती है. जब नेहरू ने 1948 में प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष की स्थापना की थी तब कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी फंड की प्रबंध समिति में होते थे| 1985 से पहले कॉरपोरेट घरानों के प्रतिनिधियों को भी इसमें जगह मिलती थी, मगर राजीव गांधी ने बाद में सिर्फ और सिर्फ पीएमओ के अधीन इसका संचालन कर दिया था |

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https://www.pmcares.gov.in/en/


5/5/2020 3:55:00 PM kids programming
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