87 फीसद शहरी भारतीयों ने कोरोना संक्रमण संकट से निपटने के सिलसिले में किए जा रहे प्रयासों के लिए केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को उच्च रेटिंग प्रदान की है। बहुराष्ट्रीय बाजार शोध कंपनी इप्सॉस ने गत माह कराए गए सर्वे की रिपोर्ट में ये बातें कही हैं। 23-26 अप्रैल तक कराए गए सर्वे में 13 देशों के 26,000 नागरिकों की प्रतिक्रियाएं ली गईं। 13 में से 9 देशों के लोगों ने माना कि सरकार कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए अच्छा काम कर रही है। 

अधिकांश लोगों ने महामारी से निपटने के सरकार के तौर-तरीकों की प्रशंसा की

इप्सॉस इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अमित अडारकर ने कहा, 'भारत सरकार ने काफी पहले संपूर्ण लॉकडाउन लागू किया। सरकार ने कोरोना वायरस का प्रसार रोकने के लिए कई साहसिक कदम भी उठाए। उसने एहतियाती उपायों के साथ ग्रीन जोन को आंशिक तौर पर खोलने की इजाजत भी दी है। सर्वेक्षण में शामिल अधिकांश लोगों ने कोरोना संक्रमण की महामारी से निपटने के सरकार के तौर-तरीकों की प्रशंसा की।'

 

महामारी को रोकने में डब्‍लूएचओ के प्रति लोगों में समर्थन में गिरावट आई

 

कोरोना वायरस को लेकर शुरुआती दौर में जारी उहापोह के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की भूमिका को 13 में से 11 देशों के लोगों ने सही माना, लेकिन मार्च के बाद से लोगों की भावनाओं में गिरावट दर्ज की गई। सर्वेक्षण के मुताबिक करीब 75 फीसद शहरी भारतीयों ने महामारी को रोकने के लिए डब्ल्यूएचओ की भूमिका को सकारात्मक माना। हालांकि, ऐसा मानने वालों की संख्या पिछले सर्वे के मुकाबले कम हुई है।

 

2018 की तुलना में पीएम मोदी पर देशवासियों का भरोसा बढ़ा

 

पिछले दिनों हुए एक सर्वे में पता चला है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भारतीयों का विश्वास का स्तर पिछले दो वर्षों में बढ़कर तीन चौथाई से अधिक या 76.3 फीसद हो गया है। आइएएनएस-सीवोटर ट्रैकर के अनुसार, देशभर में मोदी की रेटिंग 2018 की तुलना में बहुत ज्यादा बढ़ी है, जब 58.6 फीसद लोगों ने उनके नेतृत्व में बहुत विश्वास व्यक्त किया था। यह शानदार रेटिंग ऐसे समय में आई है, जब भारत कोरोना वायरस से जूझ रहा है और पीएम मोदी के प्रबंधन की देश के भीतर और विश्व स्तर पर भी प्रशंसा हो रही है।

 

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कोरोना वायरस पर अंकुश लगाने के लिए पूरे भारत में लॉकडाउन लागू करने के मोदी सरकार के फैसले की सराहना की है। डब्ल्यूएचओ ने कहा था कि वह कोविड-19 को रोकने के लिए भारत के समय पर उठाए गए कदमों और कठिन कार्यो की सराहना करता है। इसने कहा था कि संख्या के बारे में बात करना अभी जल्दबाजी हो सकती है, लेकिन राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के अलावा आइसोलेशन और कोरोना संक्रमित व्यक्ति के संपर्कों का पता लगाने से वायरस का प्रसार रोकने में जरूर सफलता मिली। 2018 में 16.3 फीसद लोग ऐसे थे, जिनका मोदी पर कोई भरोसा नहीं था। अब ऐसे लोगों की संख्या घटकर महज 6.5 फीसद रह गई है।

 

93.5 फीसद लोगों ने माना, कोरोना संकट से बेहतर तरीके से निपट रही मोदी सरकार

 

कुछ दिनों पहले हुए एक सर्वे में पाया गया कि कोविड-19 की महामारी से निपटने के लिए केंद्र की मोदी सरकार की कोशिशों में लोगों का यकीन बरकरार है। यही नहीं, लोगों के अनुमोदन रेटिंग में बढ़ोतरी जारी है। गवर्नमेंट इंडेक्स के लिहाज से देखें तो मौजूदा वक्‍त में 93.5 फीसद लोगों का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नेतृत्‍व वाली सरकार कोरोना के प्रकोप को थामने के लिए प्रभावी ढंग से काम कर रही है और इस महामारी को वह बेहतर तरीके से निपट लेगी।

 

पीएम मोदी की अपीलों पर मिला जनता का साथ

 

 

समाचार एजेंसी आइएएनएस की रिपोर्ट के अनुसार, कोरोना वायरस खिलाफ लड़ाई में पिछले एक माह में तैयारी का सूचकांक तेजी से बढ़ा है। हालांकि, आत्मसंतुष्टि का सूचकांक (Index of Complacency) नीचे चला गया है। हालांकि महामारी से निपटने के सरकारों की कोशिशों में लोगों का यकीन बरकरार है। मालूम हो कि कोरोना के खिलाफ लड़ाई में बीते दिनों पीएम मोदी ने कोरोना वॉरियर्स का हौसला बढ़ाने के लिए दो बार जनता से अपील की थी। उनकी अपील पर लोगों ने 22 मार्च को ताली, थाली और घंटे बजाए थे, जबकि दूसरी बार पांच अप्रैल को रात नौ बजे नौ मिनट के लिए मोमबत्तियां, टॉर्च, फ्लैश लाइटें जलाए थे।