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टीचर बैलगाड़ी हांकते हुए छात्रों की किताबें लेकर पहुंचे स्कूल, इस्पात मंत्रालय ने बनाया ब्रांड एम्बेसडर

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टीचर बैलगाड़ी हांकते हुए छात्रों की किताबें लेकर पहुंचे स्कूल, इस्पात मंत्रालय ने बनाया ब्रांड एम्बेसडर

मध्यप्रदेश के रायसेन जिले के सालेगढ़ गांव के प्राथमिक स्कूल के शिक्षक नीरज सक्सेना के अनूठे प्रयास देश में नजीर बन गए हैं। तमाम विपरीत परिस्थितियों में बच्चों को शिक्षित करने के प्रयासों को देखते हुए इस्पात मंत्रालय ने उन्हें अपना 'ब्रांड एम्बेसडर बनाया है। उन पर बनी डॉक्यूमेंट्री भी जारी की गई है। मप्र का नाम रोशन करने वाले इस शिक्षक ने आदिवासी अंचल में जंगल के पास बने सरकारी स्कूल को अपने भगीरथी प्रयासों से निजी स्कूल के समकक्ष खड़ा कर दिया है। उनकी देशभर में सराहना हो रही है। आठ जुलाई को नीरज सक्सेना तब चर्चा में आए थे, जब वह साढ़े चार किलोमीटर लंबे जंगल के रास्ते से स्कूल के विद्यार्थियों के लिए बैलगाड़ी से किताबें लेकर पहुंचे थे।

सालेगढ़ गांव में जंगल के समीप एक टोला पर प्राथमिक स्कूल बना हुआ है। वर्ष-2009 में दो कमरों के इस स्कूल में नीरज सक्सेना जब शिक्षक के रूप में पदस्थ हुए तब मात्र 15 बच्चे थे। वे स्कूल में कभी-कभार पढ़ने आते थे। नीरज ने शुरुआत से यहां पहले माता-पिता और बाद में बच्चों को पढ़ाई और फिर पर्यावरण के प्रति जागरूक करना शुरू किया। नतीजतन बच्चों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ने लगी। ईंटखेड़ी पंचायत में आने वाले सालेगढ़ में आदिवासियों और भील जाति के 25 परिवार रहते हैं। इनके अलावा आसपास जंगल में 20 अन्य परिवार रहते हैं। नीरज के प्रयासों से स्कूल के बच्चों की संख्या 94 हो गई है। इन सभी बच्चों में पढ़ाई का जुनून है। यहां से पढ़ाई करके शहर में हायर सेकंडरी करने वाले नीरज के पूर्व छात्र लॉकडाउन से लेकर अब तक बच्‍चों को घर-घर जाकर भी पढ़ा रहे हैं। कभी सिर्फ पत्थर और पहाड़ के लिए पहचाने जाने वाले इस गांव की पहचान अब यह आदर्श स्कूल और शिक्षक हैं।

दिल्ली से आई टीम ने देखी, नीरज के प्रयासों की सफलता

शासकीय स्कूल को निजी से बेहतर बनाने के प्रयासों की पोस्ट सोशल मीडिया पर प्रेषित करने का लाभ नीरज को यह मिला कि केंद्र सरकार के इस्पात मंत्रालय के अधिकारियों को नीरज सक्सेना के विचार भा गए। उन्होंने रायसेन के कलेक्टर उमाशंकर भार्गव से बात कर इस शिक्षक और स्कूल पर डॉक्यूमेंट्री बनाने की इच्छा जाहिर की। दिल्ली से आई एक टीम ने शिक्षक नीरज के प्रयासों को फलीभूत होते यहां देखा। फिर छह सदस्यीय टीम ने एक सप्ताह यहां रुककर डॉक्यूमेंट्री तैयार की। 21 जुलाई को मंत्रालय ने जब अपने फेसबुक सहित अन्य सोशल प्लेटफॉर्म पर इस डॉक्यूमेंट्री को जारी किया, तो नीरज के मजबूत इरादों से देश के विभिन्न हिस्सों के लोग रूबरू हुए। इसमें शिक्षक के प्रयासों और लक्ष्य को सफल होते दिखाया गया है।


7/23/2020 9:32:11 AM
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Source:

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