फिक्की इंडियन लैंग्वेज इंटरनेट एलायंस का सालाना सम्मेलन

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फिक्की इंडियन लैंग्वेज इंटरनेट एलायंस का सालाना सम्मेलन

दिशा में फिक्की - इंडियन लैंग्वेज इंटरनेट एलायंस ने सालाना सम्मेलन – ‘भाषांतर 2019’ का आयोजन किया। इस वार्षिक आयोजन में शासकीय निकायों, प्रौद्योगिकी कंपनियों, मीडिया व प्रकाशन गृहों, भाषा सेवा कंपनियों, शिक्षा जगत, वित्तीय क्षेत्र और थिंक टैंक सहित विभिन्न श्रेणियों से 250 से भी अधिक संस्थान सम्मलित हुए।

 

अगले आधे अरब उपयोगकर्ताओं तक इंटरनेट की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए भारतीय भाषाओं की क्षमता का इस्तेमाल करना' विषय पर राजधानी दिल्ली में एक सम्मेलन का आयोजन किया गया।  भारत के इंडिक इंटरनेट और लैंग्वेज टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में विकास व विस्तार के उद्देश्य से फिक्की - आयएलआयए ने भाषाअनुवाद भाषांतर प्रतियोगिता 2019 का आयोजन किया था। इस मौके पर भाषानुवाद प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कृत भी किया गया। 

इस मौके पर इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय के सचिव अजय प्रकाश साहनी ने कहा कि ज्‍यादातर भारतीयों  के पास अपनी मातृभाषा में इंटरनेट पर उपयोगी कंटेंट तक पहुंच का मौके नहीं है। उन्होंने कहा कि यह अंतर न केवल चुनौती है बल्कि एक अवसर भी है। अवसर नई खोजपरक प्रौद्योगिकी के निर्माण की ताकि इससे दोनों पक्ष लाभान्वित हो सकें।

मौके पर राजभाषा विभाग की सचिव अनुराधा मित्रा ने सभी भारतीय भाषाओं में ऑनलाइन कंटेट एवं जानकारी उपलब्ध कराने के इस पहल की तारीफ करते हुए कहा कि देश के सभी 22 आधिकारिक भाषाओं में कंटेट की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिहाज से इस तरह के पहल महत्वपूर्ण हैं। 

फिक्की की डिजिटल इकोनॉमी कमिटी के सह अध्यक्ष डॉ अजय दाता ने कहा कि इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए रास्ते की रुकावटों को दूर करना आवश्यक है। डॉ दाता ने इस पहल को केंद्र सरकार की डिजिटल इंडिया विजन के अनुरुप बताते हुए कहा कि आज इंटरनेट पर देशी भाषा सामग्री की उपलब्धता बढ़ाने और ग्रामीण क्षेत्रों में प्रौद्योगिकी समाधान को बेहतर बनाने की नितांत जरुरत है।
 
एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 45 करोड़ से ज्यादा इंटरनेट यूजर्स मौजूद हैं। बावजूद इसके क्षेत्रीय भाषाओं में इंटरनेट के इस्तेमाल का प्रतिशत और अंग्रेजी में इंटरनेट के इस्तेमाल के प्रतिशत में बड़ा अंतर है... इस बात को लेकर लगातार काम हो रहा है कि इस ग्लोबल हथियार स्थानीय संस्करण तैयार किया जाए जिससे एक बड़े समाज तक इसकी पहुंच हो और क्षेत्रीय भाषाएं भी डिजिटल माध्यम का हिस्सा बन सकें, ताकि दोनों पक्षों को लाभ हो सके। 


Nov 26 2019 8:35PM
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