शिंदे गुट को बालासाहेबची शिवसेना का नाम मिला यानी की बालासाहेब की शिवसेना। लेकिन शिंदे गुट को अभी तक चुनाव आयोग की तरफ से चुनाव चिन्ह नहीं दिया गया है। शिंदे गुट के दो चुनाव चिन्ह के विकल्प चुनाव आयोग ने खारिज कर दिए हैं।

शिवसेना नाम और चुनाव चिन्ह को फ्रीज किए जाने के बाद अब शिवसेना के दो फाड़ हो चुके हैं। हिन्दू ह्रदय सम्राट कहे जाने वाले बाला साहेब ठाकरे की शिवसेना के दो टुकड़े हो गए हैं। शिंदे गुट को बालासाहेबची शिवसेना का नाम मिला यानी की बालासाहेब की शिवसेना। लेकिन शिंदे गुट को अभी तक चुनाव आयोग की तरफ से चुनाव चिन्ह नहीं दिया गया है। शिंदे गुट के दो चुनाव चिन्ह के विकल्प चुनाव आयोग ने खारिज कर दिए हैं। शिंदे गुट की तरफ से गदा और तलवार में से चिन्ह के रूप में मान्यता देने की अपील की गई थी। लेकिन आयोग ने कहा कि ये नहीं दिया जा सकता है।

अब तीसरा विकल्प भाला फेंकता हुआ आदमी वो जरूर निर्वाचन आयोग की सूची में है। अब ऐसे में देखना है कि शिंदे गुट इसे ही स्वीकार लेता है या नहीं। पहले शिवसेना का चुनाव चिन्ह तीर कमान हुआ करता था। अब उद्धव गुट को मशाल चुनाव चिन्ह दिया गया है। वहीं उद्धव गुट को शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे का नाम मिला है। शिवसेना को लेकर उद्धव गुट और शिंदे गुट में जबरदस्त लड़ाई चल रही थी और मामला अदालत तक पहुंचा था। अब चुनाव आयोग ने दोनों को अलग-अलग नाम दे दिए हैं।  चुनाव आयोग ने शिंदे गुट को कल 11 अक्टूबर तक 3 नए प्रतीकों की एक सूची देने के लिए कहा है।

8 अक्टूबर की शाम को पारित एक अंतरिम आदेश में भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) ने शिवसेना के प्रसिद्ध ‘धनुष और तीर’ चुनाव चिन्ह को तब तक के लिए फ्रीज कर दिया। अपने आदेश के संचालन भाग ए में आयोग ने कहा कि न ही शिंदे समूह और न ठाकरे के नेतृत्व वाले धड़े को ‘शिवसेना’ नाम का उपयोग करने की अनुमति होगी। भाग (बी) में कहा गया कि न तो … समूह को … ‘शिवसेना’ के लिए आरक्षित ‘धनुष और तीर’ प्रतीक का उपयोग करने की अनुमति नहीं दी जाएगी”; और (सी) के तहत दोनों … समूहों को ऐसे नामों से जाना जाएगा जो वे चुन सकते हैं।

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