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देश का पहला जानवरों के उपयोग में लाया जाने वाला समर्पित अंडरपास

देश का पहला जानवरों के उपयोग में लाया जाने वाला समर्पित अंडरपास

सिवनी-नागपुर राजमार्ग पर बना नया एलिवेटेड सड़क संरक्षणवादियों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। पेंच बाघ अभ्यारण्य के बीच से गुजरते हुए एलिवेटेड सड़क से न केवल इन क्षेत्र के लोगों को फायदा पहुंचा है बल्कि राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 44 के चारों तरफ वन्यजीवों को संरक्षित करने में भी मदद मिल रही है।

 

मध्य भारत को देश में दीर्घकालिक बाघ संरक्षण के अच्छी क्षमता वाले क्षेत्रों में से एक के रुप में देखा जाता है। पेंच बाघ अभ्यारण्य में जंगली जानवरों के लिए देश का पहला समर्पित गलियारा बनाया गया है जिससे कि मिटिगेशन उपायों के तहत मध्य भारत में जंगली जानवरों की मृत्यु दर को कम करने और बाघों की आबादी को बढ़ाने में लंबे समय तक मदद मिलेगी।
पेंच बाघ अभ्यारण्य से सटे जंगलों के बीच से गुजरते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 44 पर 16.1 किमी लंबे एलिवेटेड सड़क और पेंच-नवेगांव-नागझिरा बाघ गलियारे पर वन्य जीवों को पार करने के लिए नौ क्रॉसिंग संरचनाओं का निर्माण किया गया है। ये देश में जानवरों के लिए बना पहला समर्पित अंडरपास है जो दुनिया में सबसे बड़ा अंडरपास भी है। इन गलियारों को जानवरों की आवाजाही पर नजर रखने के लिए सीसीटीवी कैमरों से लैस किया गया है।

जानवरों के लिए पांच अंडरपास और 4 मामूली पुलों सहित 9 क्रॉसिंग संरचनाएं बनाई गई हैं। रिसस मकाक और ग्रे लंगूर को छोड़कर 18 जंगली जानवरों की प्रजातियां इन अंडरपासों का उपयोग करते हुए पाई गईं। छोटे स्तनधारियों की सात प्रजातियों ने भी इस अंडरपास का उपयोग किया, जिसमें भारतीय खरहे और जंगल बिल्ली के अलावा  दुर्लभ रस्टी स्पॉटेड कैट भी शामिल हैं। इसके अलावा अंगुलेट प्रजाति के 5 जानवरों में चित्तीदार हिरण, गौर, नीलगाय, सांभर और जंगली सुअर भी इन अंडरपासों के नीचे से विचरण करते हुए नजर आए।

इसके अलावा मांसहारी वन्यजीवों में बाघ, तेंदुए, जंगली कुत्ते, स्लॉथ बियर और सियार भी इन अंडरपास का कम या ज्यादा उपयोग करते हुए नजर आए। जंगली कुत्ते इन संरचनाओं को सबसे अधिक बार उपयोग करते हुए पाए गए, इसके बाद बाघ इन संरचना का उपयोग करते हुए देखे गए। नौ संरचनाओं में से छह संरचनाओं का उपयोग करते हुए कुल 89 बार ग्यारह बाघ इन अंडरपास और छोटे पुल के नीचे से गुजरे।
ये संरचनाएं राजमार्ग के 16.1 किलोमीटर खंड के नीचे स्थित हैं जो बाघों के रिजर्व और आसपास के जंगलों को जोड़ती है। ये अंडरपास भारत जैसे देश के लिए सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में मील के पत्थर साबित हो सकते हैं।


9/11/2020 1:42:56 PM website company in jalandhar kids programming
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